अध्याय 206 - याद दिलाया

मार्गोट की नज़र से

कुछ पल के लिए… मैं भूल गई कि हम कहाँ हैं।

सब कुछ भूल गई।

जेल।

उसके नियम।

उसका पागलपन।

सब कुछ जैसे शून्य में घुल गया, बस मैं उसके करीब खड़ी रही, सांस अभी भी थोड़ी बिखरी हुई।

लेकिन हकीकत तो हमेशा किसी न किसी तरह वापस घुस ही आती है…

"अब तुम क्या करना चाहती हो?" कोबान की आवाज़...

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